अमेरिका–ईरान टकराव फिर चरम पर खाड़ी देशों तक पहुंची जंग की आंच दुनिया के सामने गहराया नए क्षेत्रीय संघर्ष का खतरा
मध्य पूर्व एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां किसी भी छोटी सैन्य कार्रवाई का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ महीनों से बढ़ता तनाव अब सीधे सैन्यटकराव में बदलता दिखाई दे रहा है।
मध्य पूर्व एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां किसी भी छोटी सैन्य कार्रवाई का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ महीनों से बढ़ता तनाव अब सीधे सैन्यटकराव में बदलता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी हवाई हमलों और उसके जवाब में ईरान द्वारा खाड़ी देशोंमें स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने के दावों ने पूरे क्षेत्र को युद्ध जैसे हालात मेंपहुंचा दिया है।
कतर, कुवैत और बहरीन जैसे देशों में एयर रेड सायरन बजने, अमेरिकी सैन्य ठिकानोंपर ड्रोन हमलों के दावों और ईरान के भीतर लगातार हो रही एयरस्ट्राइक ने यह संकेत दे दिया है कियह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा औरवैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।अमेरिका ने हाल ही में ईरान के भीतर लगभग 90 सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए।अमेरिकी सेंट्रल कमांड सेंटकोम के अनुसार इन हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोनभंडारण केंद्र, नौसैनिक अड्डे, तटीय निगरानी ठिकाने तथा सैन्य लॉजिस्टिक नेटवर्क को निशाना बनायागया।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान समर्थित गतिविधियों और समुद्री मार्गों परबढ़ते हमलों के जवाब में की गई। इन हमलों में ईरान के अहवाज क्षेत्र में लोगों के मारे जाने और कईअन्य के घायल होने की भी खबरें सामने आई हैं। इसके अलावा चाबहार बंदरगाह और होर्मुजजलडमरूमध्य के आसपास स्थित रणनीतिक क्षेत्रों में भी अमेरिकी कार्रवाई की खबरों ने तनाव को औरबढ़ा दिया है।अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई का दावा करते हुए कहा कि उसने कतर, कुवैतऔर बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए हैं। ईरानी सेना और रिवोल्यूशनरीगार्ड्स आईआरजीसी के अनुसार इन हमलों में कुवैत के पैट्रियट मिसाइल सिस्टम, कतर के अर्ली वार्निंगएंटीना तथा बहरीन में अमेरिकी सैन्य ईंधन भंडारण सुविधाओं को निशाना बनाया गया। हालांकि इनदावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन बहरीन और कुवैत में एयर रेड सायरन बजने तथा सुरक्षाएजेंसियों द्वारा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दिए जाने से क्षेत्र में फैले तनाव की गंभीरता साफ दिखाई देती है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस पूरे घटनाक्रम के बीच कहा है कि ईरान समझौता करना चाहताहै, लेकिन अमेरिका को इस बात पर भरोसा नहीं है कि तेहरान किसी भी समझौते का पालन करेगा।
दूसरी ओर ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा हालात में अमेरिका के साथ किसी नई वार्ता की संभावना नहीं है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि जब तक अमेरिका पुरानेसमझौतों का सम्मान नहीं करता और दबाव की नीति समाप्त नहीं करता, तब तक किसी भी तरह कीबातचीत संभव नहीं है। इस प्रकार दोनों देशों के बयान यह संकेत दे रहे हैं कि फिलहाल कूटनीतिकसमाधान की संभावना बेहद कमजोर दिखाई दे रही है।इस संघर्ष का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसकी आंच अब सीधे खाड़ी देशों तक पहुंच चुकी है।कतर, कुवैत और बहरीन लंबे समय से अमेरिका के महत्वपूर्ण सैन्य सहयोगी रहे हैं और इन देशों मेंअमेरिकी सेना के बड़े सैन्य अड्डे मौजूद हैं। यदि इन ठिकानों पर लगातार हमले होते हैं तो अमेरिका कीसैन्य प्रतिक्रिया और अधिक आक्रामक हो सकती है। इससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में व्यापक संघर्ष की आशंकाबढ़ जाएगी, जिसमें अन्य क्षेत्रीय शक्तियां भी शामिल हो सकती हैं।मध्य पूर्व के इस संकट का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई देने लगा है।
ईरान केदक्षिणी तटीय इलाकों, होर्मुज जलडमरूमध्य, चाबहार, लावान द्वीप और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सैन्यगतिविधियां बढ़ने से तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर दुनिया भर में चिंता गहरा गई है। होर्मुजजलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक कच्चे तेलका बड़ा हिस्सा गुजरता है। यदि यहां आवाजाही प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीकीमतों में तेज उछाल आ सकता है। अमेरिकी हमलों के बाद ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों मेंबढ़ोतरी इसी चिंता का संकेत है।तनाव का असर समुद्री परिवहन पर भी दिखाई देने लगा है। होर्मुज क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम बढ़ने केकारण कई जहाजों ने अपने मार्ग बदलने शुरू कर दिए हैं। भारतीय ध्वज वाले एक तेल टैंकर के भीसुरक्षा कारणों से वापस लौटने की खबर सामने आई है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती हैतो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। भारतजैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए भी यह चिंता का विषय है क्योंकि तेल की बढ़ती कीमतें महंगाईऔर आर्थिक दबाव को बढ़ा सकती हैं।
ईरान ने यह भी आरोप लगाया है कि अमेरिकी हमलों में मशहद जाने वाले पुलों और परिवहन ढांचे कोनिशाना बनाया गया, जिससे धार्मिक आयोजनों और अंतिम संस्कार कार्यक्रमों को प्रभावित करने कीकोशिश की गई। वहीं अमेरिकी पक्ष का कहना है कि उसने केवल सैन्य और रणनीतिक ठिकानों कोनिशाना बनाया है। दोनों पक्षों के दावों और आरोपों के बीच सच्चाई की स्वतंत्र पुष्टि कठिन बनी हुई है,लेकिन इतना स्पष्ट है कि संघर्ष अब केवल सैन्य प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं रह गया है और इसकामनोवैज्ञानिक तथा राजनीतिक प्रभाव भी लगातार बढ़ रहा है।


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