ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले भारत के लिए 226 अरब डॉलर का व्यापार घाटा एक बड़ी चिंता का विषय

कल से नई दिल्ली में शुरू होने जा रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर भारतीय व्यापार जगत की निगाहें आपसी आर्थिक सहयोग और नीतियों पर टिकी हुई हैं।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले भारत के लिए 226 अरब डॉलर का व्यापार घाटा एक बड़ी चिंता का विषय

नई दिल्ली,  कल से नई दिल्ली में शुरू होने जा रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर भारतीय व्यापार जगत की निगाहें आपसी आर्थिक सहयोग और नीतियों पर टिकी हुई हैं।ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में भारत और ब्रिक्स देशों केबीच कुल व्यापार 203.1 अरब डॉलर से बढ़कर 417.5 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, लेकिन इसके साथ
ही भारत का व्यापार घाटा भी 74.5 अरब डॉलर से उछलकर 226.1 अरब डॉलर हो गया है। आज के समय में भारत अपने कुल आयात का 41.5% हिस्सा ब्रिक्स देशों से मंगाता है, जबकि निर्यात मात्र 21.7% ही है, जिसमें अकेले चीन, यूएई और रूस की हिस्सेदारी 84% तक है।व्यापारिक नियमों को सरल बनाने और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर, एमएसएमई के लिए स्थानीय मुद्राओं में
भुगतान की मांगइस भारी असंतुलन को दूर करने के लिए भारतीय उद्योग जगत ने ब्रिक्स मंच से ठोस फैसलों की मांगकी है।

 पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) और केयरएज रेटिंग्स के विशेषज्ञों का माननाहै कि ब्रिक्स को अब केवल संवाद तक सीमित न रहकर एक ‘व्यापार बाधा समाधान तंत्र’ बनाना चाहिए ताकि गैर-टैरिफ बाधाएं कम हों। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट संकट के कारण 100 डॉलर प्रति बैरल केपार पहुंचे कच्चे तेल के दामों के बीच भारत रूस और खाड़ी देशों के साथ दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षासमझौते चाहता है, साथ ही छोटे उद्यमों (MSMEs) के लिए स्थानीय मुद्राओं में भुगतान और कमट्रांजैक्शन कॉस्ट की उम्मीद कर रहा है।वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच कूटनीति से आगे बढ़कर आर्थिक मुनाफे का मंच बनने कीउम्मीदइंजीनियरिंग एक्सपोर्ट्स प्रमोशन काउंसिल इंडिया (EEPC India) के चेयरमैन अरुण कुमार गरोड़िया नेकहा कि इस सम्मेलन से सदस्य देशों के बीच भू-राजनीतिक संघर्षों, विशेषकर रूस-यूक्रेन संकट कोसुलझाने में भी सकारात्मक योगदान की उम्मीद है।

 हालांकि, अमेरिकी डॉलर को पूरी तरह हटाने जैसेकिसी बड़े फैसले पर तत्काल सहमति की संभावना कम ही है। भारतीय उद्योगों का साफ संदेश है किब्रिक्स को अब वैश्विक कूटनीति के साथ-साथ घरेलू उद्योगों के लिए व्यापार को आसान, सस्ता औरसंतुलित बनाने की दिशा में कड़े और व्यावहारिक कदम उठाने होंगे।