हिंडन में गिरने वाले तीन नालों के पानी को साफ करने की तैयारी

गाजियाबाद, हिंडन को दूषित होने से बचाने के लिए एक बार फिर प्रयास शुरू किए गए हैं। नदी में गिरने वाले तीन नालों के पानी को प्राकृतिक रूप से साफ किया जाएगा। इसके लिए पिछले दिनों कुछ कंपनियों ने नगर निगम में प्रस्तुतिकरण दिया।

हिंडन में गिरने वाले तीन नालों के पानी को साफ करने की तैयारी

गाजियाबाद,हिंडन को दूषित होने से बचाने के लिए एक बार फिर यास शुरू किए गए हैं। नदी में गिरने वाले तीन नालों के पानी को प्राकृतिक रूप से साफ कियाजाएगा। इसके लिए पिछले दिनों कुछ कंपनियों ने नगर निगम में प्रस्तुतिकरण दिया। जल्दी ही टेंडर फाइनल होगा। इस प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए चार कंपनियों ने निगम में प्रस्तुतीकरणदिया। कंपनियों ने नगर आयुक्त और जलकल विभाग के अधिकारियों को नाले के पानी साफ करने की तकनीक के बारे में बताया। नालों के पानी को केमिकल के बजाय प्राकृतिक तकनीक(बायो-रेमेडिएशन) से साफ किया जाएगा। इसके बाद पानी नदी में छोड़ा जाएगा।


जलकल विभाग के महाप्रबंधक केपी आनंद ने बताया कि फिलहाल सिटी फॉरेस्ट, हिंडन विहार और कैला भट्टा के नाले पर काम कराया जाएगा। तीनों नालों का पानी हिंडन में जाता है।उन्होंने बताया कि पूर्व में टेंडर छोड़ा था, लेकिन उस समय किसी कंपनी ने नालों पर काम करनेमें दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। दोबारा टेंडर करने पर कुछ कंपनियों ने आवेदन किया है। इनसभी ने प्रस्तुतिकरण दिया है। उन्होंने बताया कि सबसे अच्छी तकनीक वाली कंपनी का चयनकर काम शुरू कराया जाएगा।उन्होंने दावा किया कि हिंडन में गिरने वाले गंदे पानी की समस्या काफी हद तक कम होगी।नदी के जल की गुणवत्ता में सुधार होगा। टेंडर प्रक्रिया एक माह में पूरी कर ली जाएगी।


महाप्रबंधक ने बताया पहले चरण में तीन नालों पर काम कराया जाएगा। प्रयोग के तौर पर यह काम कराया जाना है। प्रयोग सफल होने पर नदी में गिरने वाले अन्य नालों के पानी भी इसीतरह साफ कराया जाएगा। बता दें कि कई एसटीपी सही काम नहीं कर रहे। इस कारण पानीशोधित नहीं किया जा रहा और दूषित पानी नदी में जा रहा है।246 एमएलडी दूषित पानी नदी में मिल रहाशहरी क्षेत्र में करीब नौ नाले हैं। इनके जरिए लगभग 246 एमएलडी दूषित पानी हिंडन में मिलरहा है। नदी में दूषित पानी को रोकने की कार्य योजना पूर्व में भी तैयार की गई थी। इस समयनदी में अर्थला, करहेड़ा, इंदिरापुरम, प्रताप विहार, हिंडन विहार, कैला भट्टा, नंदग्राम, राहुलविहार और सिटी फॉरेस्ट नालों का पानी डाला जा रहा है।

पूर्व में बनी योजना परवान नहीं चढ़ी

हिंडन सहारनपुर से लेकर गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) तक है। इसकी कुल लंबाई लगभग 355 किलोमीटर है, जो नोएडा के तिलवाड़ा से यमुना में मिलती है। सहारनपुर से नोएडा तक नदी केदोनों तरफ लगभग 500 से छोटी और बड़ी फैक्टरी हैं। इनमें से कई फैक्टरी का दूषित पानी भी नदी में छोड़ा जा रहा है। नदी को दूषित होने से बचाने के लिए पूर्व में शासन और प्रशासनस्तर पर योजनाएं बनी थी। लेकिन उन पर ज्यादा दिनों तक अमल नहीं किया जा सका। इस
कारण योजना परवान नहीं चढ़ सकी थी। अब फिर से नदी को साफ करने की उम्मीद जगी है।