आस्था और भक्ति की अनोखी मिसाल, 72 दिनों तक दंडवत प्रणाम करते हुए हरिद्वार से गाजियाबाद पहुंचा शिवभक्त हिमांशु

गाजियाबाद, सावन के पावन महीने में भगवान भोलेनाथ के प्रति आस्था और भक्ति की अनोखी तस्वीर देखने को मिल रही है।

आस्था और भक्ति की अनोखी मिसाल, 72 दिनों तक दंडवत प्रणाम करते हुए हरिद्वार से गाजियाबाद पहुंचा शिवभक्त हिमांशु

गाजियाबाद,  सावन के पावन महीने में भगवान भोलेनाथ के प्रति आस्था और भक्ति की अनोखी तस्वीर देखने को मिल रही है। दिल्ली के शाहदरा निवासीशिवभक्त हिमांशु प्रजापति ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प के बल पर हरिद्वार की हरकी पौड़ी से गंगाजल लेकर गाजियाबाद तक की कठिन यात्रा दंडवत प्रणाम करते हुए पूरी की।इस यात्रा को पूरा करने में उन्हें करीब 72 दिन का समय लगा।हिमांशु भगवान भोलेनाथ के प्रति गहरी आस्था रखते हैं। इसी आस्था के चलते उन्होंने हरिद्वारपहुंचकर हर की पौड़ी से पवित्र गंगाजल लिया और उसे लेकर गाजियाबाद के लिए यात्रा शुरूकी। खास बात यह रही कि उन्होंने यह लंबी दूरी सामान्य तरीके से पैदल चलकर पूरी नहीं की,बल्कि दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ते रहे।

यात्रा के दौरान हिमांशु कुछ कदम आगे बढ़ते और फिर जमीन पर पूरी तरह दंडवत प्रणाम करते। इसके बाद दोबारा उठकर कुछ कदम आगे बढ़ते और फिर उसी तरह भगवान शिव कास्मरण करते हुए दंडवत प्रणाम करते। इसी कठिन प्रक्रिया के जरिए उन्होंने अपनी यात्रा कोलगातार जारी रखा। 72 दिनों तक चली इस यात्रा में हिमांशु को रास्ते में कई तरह की चुनौतियों का सामनाकरना पड़ा। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां, थकान और लंबी दूरी के बावजूद उनका संकल्पकमजोर नहीं पड़ा। भगवान भोलेनाथ के प्रति आस्था और विश्वास के सहारे वह लगातार आगे बढ़ते रहे और आखिरकार गाजियाबाद पहुंच गए।हिमांशु प्रजापति की यह अनोखी कांवड़ यात्रा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।रास्ते में उन्हें देखने वाले श्रद्धालु उनकी भक्ति और संकल्प की सराहना करते नजर आए।

उनके दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ने की तस्वीरें और वीडियो भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।हिमांशु अपने कंधे पर कांवड़ लेकर यात्रा करते दिखाई दिए। उनका कहना है कि इस यात्रा काउद्देश्य भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करना और हरिद्वार से लाए गए पवित्रगंगाजल को अपने निर्धारित गंतव्य तक पहुंचाना है।शिवभक्त हिमांशु की यह यात्रा यह संदेश देती है कि आस्था और संकल्प इंसान को कठिनपरिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की ताकत देते हैं। सावन के महीने में उनकी इस कठिन साधनाको देखने वाले श्रद्धालु इसे भगवान शिव के प्रति अटूट भक्ति और समर्पण की अनोखी मिसाल बता रहे हैं।