तकनीकी सहायता देने के नाम पर विदेशी नागरिकों को ठगने वाले कॉल सेंटर का पर्दाफाश
नोएडा, फेज-1 थाने की पुलिस ने सेक्टर-3 में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश कर सात आरोपियों को गिरफ्तार किया।
नोएडा,। फेज-1 थाने की पुलिस ने सेक्टर-3 में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश कर सात आरोपियों को गिरफ्तार किया। कॉल सेंटर के जरिये अमेरिका और कनाडा में रहनेवाले लोगों से तकनीकी सहायता देने के नाम पर ठगी की जा रही थी। अब तक करीब 300 लोगों कोठगने की बात सामने आई है। थाना प्रभारी ने बताया कि साइबर क्राइम थाने को ई-मेल के माध्यम सेफर्जी कॉल सेंटर के संबंध में सूचना मिली। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने बिल्डिंग के चौथे तल परछापा मारा। वहां एक व्यक्ति केबिन में बैठा मिला, जबकि छह अन्य लोग बाहर बैठे थे।
पूछताछ और तलाशी में सामने आया कि सभी लोग अमेरिका और कनाडा के लोगों को फोन करतकनीकी सहायता के नाम पर ठगी करते थे। पूछताछ के आधार पर पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों में 31 वर्षीय मोहम्मद याहया, 21 वर्षीय मोहन, 28 वर्षीय आकाश, 21वर्षीय मोहम्मद साहेब अकरम, 28 वर्षीय सुमित सिंह बिष्ट, 34 वर्षीय रियासत और सददमुद्दीन
शामिल हैं। सभी आरोपी दिल्ली में रहते हैं। पुलिस ने मौके से दो कंप्यूटर सिस्टम, मॉनिटर, की-बोर्ड,माउस, हेडफोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए।पूछताछ में आरोपियों ने बतायाकि वे अमेरिका में रहने वाले ग्राहकों को जियो चैट और रिंग सेंट्रल डायलर के माध्यम से संपर्क करते।ग्राहकों के सामने अपनी असली पहचान छिपाने के लिए अमेरिकी नाम जैसे डेविड, विक्टर, माइकल औरजेम्स आदि का इस्तेमाल किया जाता।
आरोपी खुद को प्रिंटर कंपनी का कर्मचारी बताकर ग्राहकों कीतकनीकी समस्या दूर करने की बात करते। ग्राहक के कंप्यूटर में एलएमआई ऐप के माध्यम से रिमोटएक्सेस लेकर सिस्टम को ठीक करने का बहाना बनाया जाता। इसके बाद ग्राहक के क्रेडिट कार्ड कीजानकारी हासिल कर उसके जरिये 30 से 50 डॉलर तक की रकम अलग-अलग मर्चेंट कंपनियों में चार्जकी जाती। जांच में लुनाकेयर, प्रिंटिफाई, नर्ड्स और हेलमेट जैसी मर्चेंट कंपनियों के नाम सामने आए हैं।पुलिस के मुताबिक ठगी से हासिल रकम को पहले गिरोह से जुड़े खातों में ट्रांसफर किया जाता। इसकेबाद आरोपी अपने और परिचितों के खातों में रकम भेजकर निकाल लेते। पुलिस अब बैंक खातों औरइलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर ठगी की वास्तविक रकम का पता लगाने में जुटी है।


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