फिरोजशाह कोटला के शाही महल क्षेत्र का होगा कायाकल्प, पर्यटकों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
राष्ट्रीय राजधानी के ऐतिहासिक फिरोजशाह कोटला स्मारक परिसर स्थित शाही महल क्षेत्र का जल्द ही व्यापक विकास और संरक्षण किया जाएगा।
नई दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी के ऐतिहासिक फिरोजशाह कोटला स्मारक
परिसर स्थित शाही महल क्षेत्र का जल्द ही व्यापक विकास और संरक्षण किया जाएगा। भारतीय
पुरातत्व सर्वेक्षण की योजना के तहत इस क्षेत्र में पर्यटक सुविधाओं का विस्तार, हरित क्षेत्र का
विकास तथा जर्जर ऐतिहासिक संरचनाओं के संरक्षण का कार्य शुरू किया जाएगा।
योजना के अनुसार, शाही महल क्षेत्र में लगभग 300 मीटर लंबा नया पैदल मार्ग बनाया जाएगा।
इस कार्य की शुरुआत हो चुकी है। नया मार्ग तैयार होने के बाद पर्यटकों को परिसर में सुरक्षित
और सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी। वर्तमान में इस क्षेत्र में समुचित पैदल मार्ग नहीं होने
के कारण आगंतुकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
परिसर की सुंदरता बढ़ाने के लिए पैदल मार्ग के दोनों ओर स्थित उद्यानों में बड़े पैमाने पर
पौधारोपण किया जाएगा। इसके अलावा मार्ग के किनारों पर भी हरियाली विकसित की जाएगी,
जिससे ऐतिहासिक परिसर का वातावरण अधिक आकर्षक और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा
सके।
योजना के तहत शाही महल के मुख्य प्रवेश द्वार का संरक्षण भी किया जाएगा। यह ऐतिहासिक
द्वार लंबे समय से जर्जर अवस्था में है, जिसके कारण सुरक्षा कारणों से इस हिस्से में पर्यटकों
का प्रवेश प्रतिबंधित है। संरक्षण कार्य पूरा होने के बाद इस क्षेत्र को भविष्य में फिर से आगंतुकों
के लिए खोले जाने की संभावना है।
फिरोजशाह कोटला का निर्माण 1354 ईस्वी में सुल्तान फिरोज़ शाह तुगलक ने अपनी नई
राजधानी फिरोजाबाद के हिस्से के रूप में कराया था। यमुना नदी के किनारे स्थित यह
ऐतिहासिक परिसर महल, मस्जिद, बावली और सम्राट अशोक के प्राचीन स्तंभ सहित अनेक
महत्वपूर्ण धरोहरों के लिए जाना जाता है। यहां स्थापित अशोक स्तंभ तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व
का है, जिसे मेरठ से लाकर स्थापित किया गया था।
शाही महल उस समय तुगलक शासन का प्रमुख आवासीय और प्रशासनिक केंद्र हुआ करता था,
जहां शासक दरबार लगाते थे और शासन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते थे। समय के साथ
इसका अधिकांश भाग खंडहर में परिवर्तित हो गया, लेकिन आज भी इसके अवशेष तत्कालीन
तुगलक स्थापत्य कला और वास्तुकला की महत्वपूर्ण झलक प्रस्तुत करते हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का मानना है कि प्रस्तावित विकास और संरक्षण कार्य पूरे होने के बाद
फिरोजशाह कोटला का शाही महल क्षेत्र ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण और पर्यटन की दृष्टि से और
अधिक आकर्षक बन सकेगा।


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