फोर्टिस ग्रेटर नोएडा में हाइ रिस्क इमरजेंसी एंजियोप्लास्टी से बचाई गई मरीज की जान दस प्रतिशत रह गया था हार्ट फंक्शन
ग्रेटर नोएडा। फोर्टिस अस्पताल ग्रेटर नोएडा की मेडिकल टीम ने पचास से अधिक उम्र के एक अति गंभीर मरीज का जटिल और जोखिम भरा उपचार कर नया जीवन दिया है।
फोर्टिस ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा। फोर्टिस अस्पताल ग्रेटर नोएडा की मेडिकल टीम ने पचास से अधिक उम्र के एक अति गंभीर मरीज का जटिल और जोखिम भरा उपचार कर नया जीवन दिया है। मरीज को जब अस्पताल लाया गया था तब उनका हार्ट फंक्शन यानी इजेक्शन फ्रैक्शन घटकर मात्र दस से पंद्रह प्रतिशत रह गया था। इसके साथ ही मरीज गंभीर कार्डियोजेनिक शॉक अनियंत्रित मधुमेह और उच्च रक्तचाप की समस्या से जूझ रहे थे। अस्पताल के कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ शांतनु सिंघल के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने तत्काल आपातकालीन प्रक्रियाएं शुरू कीं और मरीज की पम्पिंग क्षमता को दस प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे पैंतालीस प्रतिशत तक पहुँचाने में सफलता हासिल की।
अस्पताल लाते समय बेहद गंभीर थी मरीज की हालत
मरीज को जब परिजनों द्वारा फोर्टिस अस्पताल लाया गया तो वह पिछले चौबीस घंटों से सीने में भारीपन और सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना कर रहे थे। स्थिति इतनी नाजुक थी कि मरीज के फेफड़ों में पानी भर गया था जो किसी भी क्षण जानलेवा साबित हो सकता था। इसके अतिरिक्त उनका रक्तचाप लगातार घट-बढ़ रहा था और दो सौ बटा सौ के खतरनाक स्तर पर पहुँच चुका था। मरीज की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बिना देर किए वेंटिलेटर सपोर्ट पर लिया और स्थिति को स्थिर करने के लिए तुरंत उच्च श्रेणी की जीवनरक्षक दवाएं देना शुरू किया।
ब्लॉकेज और कार्डियाक अरेस्ट का बना हुआ था बड़ा खतरा
जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि मरीज की हृदय धमनियों में गंभीर अवरोध यानी ब्लॉकेज था। एक्यूट हार्ट फेलियर और बेहद कम हार्ट फंक्शन के कारण मरीज को किसी भी क्षण कार्डियाक अरेस्ट आ सकता था। ऐसी स्थिति में सीधे पारंपरिक एंजियोप्लास्टी करना मरीज की जान के लिए अत्यंत जोखिम भरा साबित हो सकता था। इस खतरे को कम करने के लिए डॉक्टरों ने एक विशेष रणनीति अपनाई और मरीज के एओर्टा में कैथेटर तथा बैलून युक्त मैकेनिकल डिवाइस यानी इंट्रा एओर्टिक बैलून पम्प लगाया। इस डिवाइस की मदद से मरीज के दिल को रक्त पम्प करने में सहायता मिली और उनकी स्थिति थोड़ी स्थिर हो सकी।
पंद्रह मिनट की आपातकालीन प्रक्रिया से मिली बड़ी सफलता
मरीज को दो दिनों तक गहन चिकित्सा कक्ष यानी आईसीयू में लगातार निगरानी में रखा गया। जब मरीज की हालत में थोड़ा सुधार हुआ तब डॉक्टरों ने केवल पंद्रह मिनट चली एक बेहद सूक्ष्म और सटीक मेडिकल प्रक्रिया के माध्यम से उनकी मुख्य धमनी में बने अवरोध को सफलतापूर्वक हटा दिया। इस प्रक्रिया के दौरान लो डाइ तकनीक का उपयोग किया गया ताकि मरीज के गुर्दों या अन्य अंगों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। उपचार के अगले ही दिन मरीज के शरीर ने सकारात्मक संकेत दिए जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर और मैकेनिकल पम्प सपोर्ट से सुरक्षित रूप से हटा लिया गया।
हार्ट फंक्शन में दिखा अभूतपूर्व सुधार
उपचार के एक सप्ताह बाद जब मरीज के स्वास्थ्य की दोबारा जांच की गई तो डॉक्टरों की टीम भी परिणामों से बेहद उत्साहित हुई। मरीज का इजेक्शन फ्रैक्शन जो पहले मात्र दस से पंद्रह प्रतिशत के बीच अटका हुआ था वह बढ़कर पैंतालीस प्रतिशत तक पहुँच चुका था। यह रिकवरी चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है क्योंकि इतने कम इजेक्शन फ्रैक्शन वाले मरीजों में जान का जोखिम सबसे अधिक होता है।
स्वस्थ होकर घर लौटे मरीज
मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। वर्तमान में वे सामान्य जीवन जी रहे हैं और उन्हें किसी प्रकार के कार्डियाक लक्षण या सांस की तकलीफ का सामना नहीं करना पड़ रहा है। वे केवल नियमित जांच के लिए ओपीडी में डॉक्टरों के संपर्क में हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जल्द ही रूटीन कार्डियोलॉजी रीहेबिलिटेशन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद मरीज अपनी दैनिक गतिविधियों और पेशेवर जीवन में पूरी तरह से सक्रिय हो सकेंगे।
चिकित्सकों और प्रबंधन ने साझा किए अनुभव
इस मामले पर जानकारी देते हुए डॉ शांतनु सिंघल ने बताया कि ऐसे मरीज का इलाज करना जिनका ब्लड प्रेशर दो सौ तक पहुँच गया हो और फेफड़ों में पानी भरा हो बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था। हमारी टीम ने स्पेश्यलाइज़्ड हार्ट असिस्ट पम्प की मदद से सबसे पहले मरीज को स्थिर किया और फिर तेजी से अवरोध दूर किया जिससे अचानक होने वाले कार्डियाक अरेस्ट से बचाव हो सका।
वहीं अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ शानू शर्मा ने कहा कि बेहद नाजुक और जटिल आपातकालीन परिस्थितियों में भी उन्नत और जीवनरक्षक कार्डियाक केयर प्रदान करना हमारी प्राथमिकता है। दस प्रतिशत जैसे जीवनघाती स्तर से मरीज के हार्ट फंक्शन को पैंतालीस प्रतिशत तक पहुँचाना हमारी क्लीनिकल टीम की उच्च स्तरीय विशेषज्ञता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक अग्रणी संस्थान है जो देश के कई राज्यों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। संस्थान के पास चार सौ से अधिक डायग्नोस्टिक प्रयोगशालाएं और छह हजार से अधिक बेड्स की क्षमता है। आईएचएच हेल्थकेयर के सहयोग से यह संस्थान दुनिया के कई देशों में मरीज केंद्रित उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है। ग्रेटर नोएडा स्थित इस केंद्र में हुआ यह सफल उपचार इस क्षेत्र के मरीजों के लिए एक बड़ी राहत और उम्मीद की किरण है।


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