यमुना की सफाई पर फिर सवाल, कई नाले और सीवेज प्लांट जांच में फेल
दिल्ली में यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के सरकारी प्रयासों के बीच दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की जून माह की निगरानी रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है।
दिल्ली में यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के सरकारी प्रयासों के बीच दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की जून माह की निगरानी रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है।रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राजधानी के कई बड़े नालों का पानी अब भी अत्यधिक प्रदूषित है और कुछसीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भी गंदे पानी का शोधन निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं कर पा रहे हैं।ऐसे में यमुना में प्रदूषण का दबाव कम होने के बजाय बरकरार रहने की आशंका जताई जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, यमुना में गिरने वाले कई नालों में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) औरकुल अघुलनशील ठोस कण (टीएसएस) का स्तर निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक दर्ज किया गया।बीओडी पानी में मौजूद जैविक गंदगी का संकेतक है, जबकि टीएसएस पानी में ठोस अपशिष्ट और कचरेकी मात्रा को दर्शाता है। पर्यावरण मानकों के अनुसार नालों के पानी में बीओडी 30 मिलीग्राम प्रति लीटरऔर टीएसएस 100 मिलीग्राम प्रति लीटर तक ही होना चाहिए, लेकिन जांच में कई स्थानों पर बीओडी
80 से 140 मिलीग्राम प्रति लीटर तथा टीएसएस 200 से 370 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पाया गया।रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुछ नालों में निरीक्षण के दौरान पानी का बहाव नहीं मिला, जबकिहिंडन कट नाले की स्थिति अन्य नालों की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर रही।
विशेषज्ञों का मानना है किजब तक नालों से यमुना में जाने वाले प्रदूषित पानी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होगा, तब तक नदी कीसफाई के प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाएंगे।


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